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By , September 10, 2009 7:03 am

जिले का ऐतिहासिक भौगोलिक सामाजिक परिदृश्यः- वर्तमान बाडमेर का इतिहास विक्रम की दसवीं शताब्दी के पूर्व प्रतिहार एवं भाटी राज वंच्चों से सम्बन्ध रहा हैं। यह क्षेत्र किरात, च्चिवकूप एवं मेलोप्हथ तीन भू-भागो में विभक्त था। विक्रम की दसवीं शताब्दी में ÷÷ सिधुराज महाराज ÷÷ मरुमण्डल का शासन था। यह राज्य आबू से किरात कूप ओंसिया तक फैला हुआ था। संधुराज कें बाद उत्पलराज अख्यराज और कृृृच्च्णव प्रथम (वि..1024) यहाँ के शासक रहें। विक्रम की 11वीं शताब्दी के मध्य यहा धरणीधर नामक प्रख्यात परमार राजा हुआ। इसके धुव्र भट्ट महीपाल (यादवराज) और बागभट्ट अथवा बहडराव प्राचीन बाडमेरं को बसाने वाला था। जिसकी स्थिति जूना-केराडू के पहाडो के पास हैं। वि.. 1608 में जोधपुर के राव मालदेव गंगावत नें बाडमेर और कोटडा घारानो पर अपना अधिकार कर लिया। यहा का सरदार भीम जैसलमेर भाग गया और वहॉ भाटीयो के सैन्य दल के साथ पुनः लौटा किन्तु युद्व में हार जानें से उसने मालदेव की अधीनता स्वीकार कर ली। ख्यातौं के अनुसार भीम रतनावत राव जगमाल की सातवी पीढी मे हुआ। इसी भीमजी रतनावत ने बापडाउ के ठिकाने पर वि.. 1642 में वर्तमान बाडमेर बसाया। भीमजी रतनावत के समय से ही बाडमेर-जोधपुर राज्य के अधीन रहा तथा .सं.1891 में इसका विलिनीकरण मारवाड में कर हाकिमी शासन प्रारम्भ हुआ जो स्वाधीनता पर्यन्त चलता रहा। आजादी के बाद यह जिला पच्च्िचमी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर महत्वपूर्ण हैं। सन्‌1965 एवं 1971 के भारत-पाक युद्व का क्षेत्र भी यह जिला रहा। भू भाग एवं जलवायु: बाडमेर जिला राजस्थान के 24 डिग्री 58 अंच्च से 32 अंच्च एंव उतरी अक्षांच्च 70 डिग्रीं 52 अंच्च पूर्वी देच्चान्तर के मध्य स्थित है।

इसके उत्तर मे जैसलमेर दक्षिण मे जालोर पूर्व मे पाली एंव जोधपुर जिला एंव पश्चिम में 270 किलोमिटर सीमा पाकिस्तान से सटी हुई है जो 480 मील की लम्बाई मे बहती है। इस जिले के रामपुरा गांव मे प्रवेच्च कर लुणी नदी गांधव और जालोर होते हुए कच्छ खाडी मे मिल जाती है। जिले कि जलवायु शुष्क है तथा गर्मियो मे अधिक गर्मी एवं सर्दियो मे अधिक सर्दी रहती है। गर्मियो मे यहां का तापमान 48 डिग्री तथा सर्दी मे 5 डिग्री तक हो जाता है। यहां वर्षा का औसत 277 मि.मी. है। मई 2003 को समाज मे स्वास्थ्य पर्यावरण रोजगार एवं च्चिक्षा का उजियारा फैलाने का उदेच्च्य लेकर मयूर ग्रामिण विकास संस्थान का गठन किया गया संस्था अध्यक्ष बाबु गोस्वामी के मार्गदर्च्चन सचिव नेताराम भाटी की सकारात्मक सोच ने सात साल मे संस्था को नई उचाईयां प्रदान की। मयूर ग्रामिण विकास संस्थान ने च्चिक्षा के क्षैत्र मे पिछडे नेहरूनगर के लोहार बस्ती में जाकर च्चिक्षा के प्रति जागरूकता का अभियान चलाकर लोहार बस्ती के बच्चो के भविष्य को लेकर बस्ती वासीयो को च्चिक्षा के लिये प्ररित किया साथ लेजाकर करीब 225 बच्चो को सरकारी वियालय मे र्भती करवाया उनको कापी किताबे दिलवायी ताकी बच्चो की पढाई मे किसी भि प्रकार का विध्न ना पडे। ईसी दौरान संस्था ने पॉलीथीन विरोध महाअभियान का आगाज किया जिले भर मे प्रतियोगिताओ का आयोजन कर विघलयी छात्रो को अभियान से जोडा गया तत्कालीन जिला कलेक्टर उपखण्ड अधिकारी ने इस अभियान मे पूर्ण समर्थन दिया पांच हजार छात्रो द्वारा निकाली गई पॉलिथीन विरोध रैली कर शहर भर मे पॉलिथीन विरोध माहोल बनाया गया जिसका की व्यापक असर राज्य भर मे हुआ संस्था से प्रेरणा लेकर जैसलमेर,जालोर,पाली,जोधपुर सहित अनेक जिलो मे पालिथिन वरोध अभियान चलाया राज्य सरकार ने संस्था की इस पहल पर राज्य भर मे पुनः चकित प्लास्टिक थैलियो पर प्रतिबंध लगाया। संस्था की यह सबसे बडी सफलता रही। संस्था ने पर्यावरण के क्षैत्र में उलेखनीय कार्य किया पर्यावरण जागरूकता का कार्य हाथ में लिया संस्था ने वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह पर्यावरण दिवस,वानिकीदिवसो पर विभिन्न कार्यक्रमो का आयोजन किया वही संस्था ने 20 गांवो मे पर्यावरण जन चेतना च्चिविरो का आयोजन कर ग्रामिणो एंव छात्रो को अभियान से जोडा। संस्था ने पर्यावरण के क्षैत्र मे वन्य प्राणियों के संरक्षण के प्रचार प्रसार,पौधे लगाने के संकल्प जैसे कार्यो का सफल आयेजन किया संस्था ने परिवार कल्याण एड्स नियंन्त्रण आयोडिन नमक,बालविवाह,सामाजिक कुरूतियो के खिलाफ जन जागरण के अनेको प्रयास किए। संस्था दलित तथा शोषित वर्ग के उत्थान पर्यावरण संरक्षण तथा च्चिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षैत्र में उलेखनिय कार्य करने की राह पर हैं। संस्था द्वारा परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत जिला मुख्यालय एंव ग्रामिण अंचलो मे विचार गोष्ठीयों ,रैलियों तथा प्रभात फेरियो का आयोजन किया जिसमें परिवार कल्याण कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। छात्रो के माध्यम से छोटा परिवार सुखी परिवार का सन्देच्च घर-घर तक पहुंचाया गया तथा ग्रामिण आंचलो में विच्चेषकर अल्प संख्यक महिलाओ को परिवार कल्याण कार्यक्रमों को अपनाने के लिये समज्ञाईस की गई। मुस्लिम बाहुल्य गांवों में संस्था निरतंर प्रयासरत हैं वही लोक कला उत्था के माध्यम से विभिन्न ग्रामीण विधालयो ग्राम पंचायतों में सास्कृर्तिक कार्यक्रमो का आयोजन कर लोगो को प्रोत्साहित किया। मलेरिया रोधी परियोजना से मयुर ग्रामीण विकास सस्थान ने चिकित्सा विभाग के सहयोग से लगभग 230 गावो में जाकर मलेरिया रोधी दवा का छिडकाव किया। मलेरिया के फेलने तथा उसको रोकने की व्यापक जानकारी गांव गांव में जाकर लोगो को दी। सस्ंथा ने रामसर क्षेत्र के 9 ब्लाक गुडामालानी के चार ब्लाक तथा गूंगा के तीन ब्लाको मे मलेरिया रोधी दवा का छिडकाव किया लगभग 2.70 लाख की आबादी को लाभान्वित किया। डी डी टी पाउण्डर के अलावा डेल्टा से भी विभिन्न डार्क जोन क्षेत्रो मे मलेरिया रोधी स्प्रे कराया। उपभोक्ता संरक्षणमयूर ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा जिला प्रच्चाषन के साथ मिलकर उपभोक्ता संक्षण पर विभिन्न कार्यक्रमों

 

 

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