विभिन कार्यक्रम

By , September 22, 2009 2:07 am

राजस्थान में बाढः-
राजाओं का राज्य राजस्थान, जिसके शाही ठाट-बाट, शूरवीरता और बलिदान के अनगिनत किस्से विच्च्वप्रसिद्ध है। जिसके फलस्वरूप प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक यहां खिंचे चले आते है। और इसके ऐतिहासिक गौरव को निहार कर स्वयं भी गौरवान्वित महसूस करतें हैं। राजस्थान के इस वैभव और शान-ओ-शौकत से परे सिक्के का दूसरा पहलु भी है, जहां मीलों फेला रेगिस्तान और अभावग्रस्त पर्यावरण विद्यमान है। जहां गरीबी, भूखमरी और विपरीत मौसम के कारण जीवन का अस्तित्व खतरें मे है। राजस्थान के अधिकांच्च भागों में पानी का सर्वथा अभाव हैं। हर दूसरा वर्ष अकाल यहां के वातावरण का सामान्य व्यवहार बन चुका हैं।
किन्तु इस वर्ष 2006 बाड़मेर-जैसलमेर जिलें मे माह अगस्त में हुई अतिवृष्टि ने पुराने सभी रिकार्ड तोड़कर इस व्यवहार को बदल दिया हैं। क्षेत्र के इतिहास में पहली और वर्ष की सबसे भयंकर त्रासदी के रूप में बाढ़ के हालात इतने दयनीय हो गये कि बायतु व च्चिव ब्लॉक के करीब 80 निचले गांव इससे पूरी तरह तबाह हो गये जिसमें अब तक 300 लोगों की जनहानिक की पुष्टि हो चुकी हैं। और कई लापता है जबकि अनुमानत + 100000 जंगली और पालतु पच्चुओं की मौत हुई हैं। च्चिव उपखण्ड के मलवा और बायतु उपखण्ड के भाडखा व कवास पंचायत समितियों के 80 गॉवों मे सर्वाधिक हानि हुई हैं।
मयूर ग्रामीण विकास संस्थान संस्था ने अन्य सहयोगी संस्थाओं और प्रच्चासन के साथ मिलकर राहत कार्य में अपनी सहभागिता निभाई। पीड़ित परिवार के लोगो को आपातकालीन राहत तो मिल चुकी है किन्तु अभी भी स्थायी राहत का इन्तजार है, जिसके तहत लोगों का पुनर्वास प्रमुख हैं।
प्रस्तुत पत्रिका मे सभी गतिविधियों का विस्तृत विवरण तो संभव नही होगा फिर भी उनकी संक्षिप्त झलक पाकर आप जानेंगे कि संस्था के सहयोग से लोगो के जीवन परिवर्तन मे कैसे सहभागी हो रही हैं। इस वर्ष मयूर ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा जन सहयोग से अनेक कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है।
पश्चिमी राजस्थान मे बाड़मेर जिला सीमावर्ती व रेगिस्तानी ईलाका है जहां पर बाढ की कल्पना करना ना मुमकिन है लेकिन कुदरत के खेल निराले है जिसने रेगिस्तान में भी नदी को बाढ के विकराल रूप मे लाकर इन्सान को सोचने पर मजबुर कर दिया कवास व मलवा गॉव मे 23 अगस्त 2006 को आयी विकराल बाढ से हजारो लोग बेघर हो गये जिसमे कई सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओ ने साथ मिलकर उनकी सहायता ।
की मरुस्थलीय प्रदेच्च की विषम परिस्थितियो एवं स्थानीय वातावरण के आंच्चिक प्रोत्साहन न के बावजुद लोगों की मदद व सेवा करना बड़ा ही कठिन हैं ऐसी परिस्थितियों में भी पारस बनकर निःस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं।
मयूर ग्रामीण विकास संस्थान कैसा भी काम हों उनकें पास हर समस्या का समाधान है एक ऐसी ही घटना याद करते है तो दिल दहल जाता हैं जो भुलाये नही भुलती जब कवास की बाढ़ का नाम लेते है तों पूरा चलचित्र सामने दिखाई देता हैं
संस्था सचिव नेताराम भाटी एव भाई और मित्रो व उनके विदेच्ची मित्र पिटर लाचोविज जो की {GEOFIZYKA TORUN COMPNY BARMER UNIT} से एक अन्य साथी के साथ मिलकर हवा वाली नाव व हवा से भरे टयुब एवं जुगाड के साधनो से नाव बना कर कवास गॉव मे जाकर और अपनी अलग-अलग तीन टीमें बनाकर व एक ट्यूब से नाव बनाकर कम से कम 350 लोगों को व उनके सामान को बाढ से बचाया और सुरक्षित स्थान पर पहुचाया।
उस हादसे के नायक भाटी को लोग आज भी याद करते हैं लगातार तीन दिन से बरसात थमने का नाम नही ले रही थी और प्रच्चासन द्वारा बाढ की चेतावनी जारी की जा चुकी थी पर गॉव वालो को रेगिस्तान मै बाढ का नाम सुनकर भी हंसी आ रही थी पर मयूर ग्रामीण विकास संस्थान के सचिव नेताराम व उनके सभी साथीयों ने घर घर जाकर कहा की बाढ आ सकती है तुम सुरक्षित स्थानो पर चले जाओ लेकिन काफी लोग निकल नहीं पाये क्योकि जहां पर प्यास बुझाने के लिये पानी नही मिलता वहां बाढ की कल्पना करना भी लोगो की समझ से परे था और यह हमारे लिये किसी भी परेच्चानी से कम नहीं था ।
अन्धेरी रात मे धीरे धीरे पानी बढता गया और अचानक किसी छोटे बंधे खडीन [ खेत का पानी खेत मे { पानी को इकठा करने का मिटटी से बना बांध } ] के टुटने से पानी का स्तर अचानक बढ गया ऐसे करीब साढे तीन सौ खडीन टुटने से पानी बाढ के विकराल रुप मे आया कि लोगो को निद्रा से जागने का मौका तक नही दिया और हमेच्चा की चिरनिद्रा में सुला दिया ।
हजारो परिवारो को समझा बुझाकर लेकर आये मयूर ग्रामीण विकास संस्थान के नेताराम भाटी व उनके दल को वे लोग आज भी याद करते हैं। क्योकि जहां से उन को निकाला गया था वहां पर एक बडा रेत का टीला था जो कि पानी के बहाव की वजह से धीरे-धीरे कटने लगा था और वहां पर पानी का लेवल करीब 30 फिट के आस पास था और जमीन करीब 6 किलोमीटर दुर थी इसी लिये बचाव अभियान को तीन चरणो मे पूरा किया गया
प्रथम चरण मे नांव द्वारा बच्चो व महिलाओ को एक सुरक्षित जगह पर पहुचाया गया और जहां से दुसरी टीम द्वारा पानी की कम गहराई तक लाया गया व तीसरी टीम ने बच्चो को कंधो पर व महिलाओ को हाथ से सहारा देकर जमीन तक पहुचाया व
वहां पर उनको खाने व पीने कि व्यवस्था व फस्ट एड कि सुविधा उपलब्ध करवायी क्योकि बच्चे दो दिनो के भुखे व प्यासे थे और बीमार थे।
इस बचाव अभियान के दौरान एक ग्रामीण महिला अपने बच्चे के साथ नाव मे चढते समय पांव फिसल गया तो उसके हाथ मे से बच्चा बहते हुऐ पानी मे जा गिरा अचानक हुऐ इस हादसे से सभी लोग सन्न रह गए पर नेता राम ने आव देखा ना ताव झट कुद पड़े पानी मे और बहते बच्चे को पकड़ लिया;एक हाथ से नांव से बंधी रस्सी को पकड़े खुद का व बच्चे का बचाव किया और तब इनके मित्र पिटर ने बच्चे को बाहर निकाला व उल्टा लिटाकर शरीर से पानी बाहर निकाला व क्रत्रिम सांस देकर बच्चे को होच्च मे लाये होच्च आने पर बच्चे के माता-पिता कि आखें भर आयी उन्होने सबका अहसान जताया। बाकी बच्चे हुए लोगो को अलग- अलग टोलियां बनाकर लोगो को बचाते रहे खुद बीमार पड़ गये लेकिन जब तक एक भी परिवार बाढ़ में से नही निकाले गये और लोगो को सुरक्षित स्थान पर नही पहुचाया गया तब तक वे प्रयास करते रहे ओर उनके खाने पिने रहने कि व्यवस्था अपने स्तर पर कराके उनको सुरक्षित स्थान पर पहुचाने की सुविधा प्रदान की। 23 अगस्त 2006 को आई भंयकर बाढ ने बाड़मेर जिले के कवास गॉव को र्बबाद कर दिया मरुस्थलीय प्रदेच्च की विषम परिस्थितियो एवं स्थानीय वातावरण के आंच्चिक प्रोत्साहन के बावजुद लोगों की मदद व सेवा करना बडा ही कठिन हैं ऐसी परिस्थितियों में भी पारस बनकर निःस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं
मयूर ग्रामीण विकास संस्थान ने कवास गॉव के वांच्चिदों को कई जगह पर राहत सामग्री पहुचाई व ग्रामिणो के रहने के लिये टेंट व भोजन सामग्री एवं कम्बल कि व्यवस्था उपलब्ध करवाई ।

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